नक़्शे पर
-
बड़ा गणेश मंदिर 0.1 किमी
महाकाल मंदिर के ठीक बग़ल में ऋद्धि-सिद्धि सहित विशाल गणेश प्रतिमा और पंचमुखी हनुमान। ज़्यादातर श्रद्धालु दर्शन के बाद यहीं होकर निकलते हैं।
-
हरसिद्धि माता मंदिर 0.5 किमी
पैदल कुछ ही मिनट की दूरी पर शक्तिपीठ, जो अपने दो ऊँचे दीप-स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है; त्योहारों की शाम इन्हें जलाया जाता है — यह नज़ारा देखने लायक है।
-
गोपाल मंदिर 1 किमी
मुख्य बाज़ार में बायजाबाई शिंदे द्वारा बनवाया उन्नीसवीं सदी का कृष्ण मंदिर। वैकुंठ चतुर्दशी की रात हरिहर मिलन के लिए महाकाल यहीं आते हैं।
-
राम घाट 1.3 किमी
क्षिप्रा का मुख्य घाट और सिंहस्थ का प्रमुख स्नान स्थल। शाम की आरती पर भीड़ जुटती है, और सवारी यहाँ क्षिप्रा पूजन के लिए रुकती है।
-
जंतर मंतर (वेधशाला) 1.8 किमी
सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा लगभग 1725 में बनवाई वेधशाला। उज्जैन भारतीय खगोल विज्ञान की मध्य रेखा थी, इसीलिए यह यहाँ बनी।
-
भर्तृहरि गुफा 5 किमी
क्षिप्रा किनारे की गुफाएँ, जहाँ परंपरा के अनुसार राजा भर्तृहरि ने राजपाट छोड़कर तपस्या की थी।
-
गढ़कालिका मंदिर 5.2 किमी
देवी कालिका का मंदिर, जिनकी परंपरा के अनुसार कवि कालिदास ने उपासना की थी।
-
सांदीपनि आश्रम 5.5 किमी
परंपरा के अनुसार वह आश्रम जहाँ कृष्ण, बलराम और सुदामा ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा ली। मंगलनाथ रोड पर।
-
काल भैरव मंदिर 6 किमी
उज्जैन के रक्षक देवता, जिनका उल्लेख स्कंद पुराण में है। यहाँ देवता को मदिरा चढ़ाई जाती है, जो बाहर की दुकानों पर मिलती है।
-
चिंतामण गणेश मंदिर 6.4 किमी
क्षिप्रा पार का पुराना गणेश मंदिर, जहाँ गणेश के तीन रूप हैं — चिंतामण, इच्छामण और सिद्धिविनायक।
-
मंगलनाथ मंदिर 6.5 किमी
शिव मंदिर, जिसे पुराणों में मंगल ग्रह की जन्मस्थली माना गया है। लोग मंगल दोष की पूजा के लिए आते हैं।
-
कालियादेह महल 9 किमी
मांडू के महमूद ख़िलजी के समय 1458 में क्षिप्रा किनारे बना महल, जिसमें सूर्य मंदिर और पानी की नहरें हैं।
-
इंदौर 56.7 किमी
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा शहर और उज्जैन का हवाई द्वार: राजवाड़ा, सराफ़ा की रात की खाऊ गली और खजराना गणेश।
-
माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा 101 किमी
आगर मालवा में लखुंदर नदी किनारे बगलामुखी का मंदिर, जो तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है।
-
देवास टेकरी 110 किमी
देवास की पहाड़ी पर चामुंडा माता और तुलजा भवानी के मंदिर; नवरात्रि में सबसे अधिक भीड़।
-
ओंकारेश्वर 136 किमी
मध्य प्रदेश का दूसरा ज्योतिर्लिंग, नर्मदा के टापू पर। ज़्यादातर श्रद्धालु महाकाल और ओंकारेश्वर एक ही यात्रा में करते हैं।
-
मांडू 137 किमी
मालवा के सुल्तानों का खंडहर नगर: जहाज़ महल, रूपमती मंडप और जामा मस्जिद।
-
महेश्वर 149 किमी
नर्मदा किनारे अहिल्याबाई की होलकर राजधानी: क़िला, घाट और महेश्वरी बुनाई।
